फट जाती महाधमनी तो बचना मुश्किल था : एमएमआई के डॉक्टरों ने 90 वर्षीय महिला को दी नई जिंदगी

फट जाती महाधमनी तो बचना मुश्किल था : एमएमआई के डॉक्टरों ने 90 वर्षीय महिला को दी नई जिंदगी

रायपुर। 90 वर्षीय महिला के जटिल एओर्टिक एन्यूरिज्म (महाधमनी में सूजन) का एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल, रायपुर में सफल इलाज किया गया। शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर डॉक्टरों ने बताया कि छत्तीसगढ़ में 90 वर्ष या उससे अधिक आयु के मरीज पर एंडोवैस्कुलर एओर्टिक एन्यूरिज्म रिपेयर (EVAR) तकनीक से किया गया, यह अपनी तरह का पहला सफल मामला है।

बताया गया कि महिला पेट दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंची थीं। जांच में पता चला कि उनकी महाधमनी (एओर्टा) के निचले हिस्से में 64 मिमी का बड़ा एन्यूरिज्म बन गया था, जिसमें रक्त का थक्का भी मौजूद था। डॉक्टरों के मुताबिक यह किसी भी समय फट सकता था और ऐसा होने पर मरीज की जान बचने की संभावना बेहद कम थी।

मामला इसलिए भी चुनौतीपूर्ण था क्योंकि मरीज की उम्र 90 वर्ष थी,उन्हें पहले से हृदय संबंधी समस्याएं थीं और उनकी रक्तवाहिनियां अत्यधिक घुमावदार थीं। इसके अलावा किडनी और आंतों तक रक्त पहुंचाने वाली महत्वपूर्ण धमनियां एन्यूरिज्म के बेहद करीब थीं। ऐसे में पारंपरिक ओपन सर्जरी करना काफी जोखिम भरा था।

विशेषज्ञों ने न्यूनतम चीरे वाली एंडोवैस्कुलर तकनीक (EVAR) अपनाने का फैसला किया। 26 जून को करीब 4 घंटे 20 मिनट तक चली प्रक्रिया में 168 मिमी के एंडोवैस्कुलर स्टेंट ग्राफ्ट और विशेष 'रिवर्स स्लाइडिंग तकनीक' का इस्तेमाल कर एन्यूरिज्म को सुरक्षित किया गया। इस दौरान किडनी और आंतों तक रक्त प्रवाह भी सामान्य बनाए रखा गया। पूरी सर्जरी बिना किसी जटिलता के सफल रही और मरीज को चार दिन बाद 29 जून को स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

डॉक्टर बोले- उम्र और रक्तवाहिनी की जटिल बनावट सबसे बड़ी चुनौती थी

प्रक्रिया का नेतृत्व करने वाले वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ एवं क्लीनिकल लीड डॉ. सुमंता शेखर पाढ़ी ने बताया कि मरीज की अधिक उम्र और रक्तवाहिनी की जटिल संरचना के कारण यह बेहद चुनौतीपूर्ण केस था। टीम की प्राथमिकता एन्यूरिज्म का सुरक्षित इलाज करने के साथ किडनी और आंतों तक रक्त प्रवाह को बनाए रखना था।

कार्डियोवैस्कुलर सर्जन डॉ. मोहम्मद वसीम खान ने बड़े स्टेंट ग्राफ्ट को सुरक्षित तरीके से रक्तवाहिनी तक पहुंचाने और प्रक्रिया के बाद रक्तस्राव रोकने की जिम्मेदारी निभाई। वहीं एनेस्थीसिया की जिम्मेदारी डॉ. अरुण अंडप्पन और डॉ. स्नेहा खोबरागड़े ने संभाली।

एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल के फैसिलिटी डायरेक्टर तपानी घोष ने कहा कि यह उपलब्धि अस्पताल की विशेषज्ञ टीम की दक्षता और आधुनिक न्यूनतम इनवेसिव तकनीकों के जरिए हर आयु वर्ग के मरीजों को सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। अब अत्यधिक उम्र के मरीजों का भी जटिल हृदय एवं रक्तवाहिनी संबंधी रोगों का प्रभावी इलाज संभव हो रहा है।