केवीजीयू टीचर्स ने सीखे जनरेटिव AI और एडवांस टेक्नोलॉजी के गुर

केवीजीयू टीचर्स ने सीखे जनरेटिव AI और एडवांस टेक्नोलॉजी के गुर

रायपुर। उच्च शिक्षा में तेजी से बढ़ रहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग को ध्यान में रखते हुए कृष्णा विकास ग्लोबल यूनिवर्सिटी (केवीजीयू), रायपुर में तीन दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) का आयोजन किया गया। 17 से 19 जुलाई तक आयोजित इस ऑफलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम में शिक्षकों को जनरेटिव AI, इंटरैक्टिव ई-कंटेंट निर्माण और आधुनिक शिक्षण तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के डायरेक्टर डॉ. एस.एन. पांडा ने किया। इस दौरान इंटरनल क्वालिटी इवैल्यूएशन सेल की डायरेक्टर डॉ. सीमा अग्रवाल ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कहा कि बदलते समय में शिक्षकों को नई तकनीकों से लैस करना उच्च शिक्षा की आवश्यकता बन गई है।

AI से पढ़ाई को कैसे बनाया जाए बेहतर, विशेषज्ञों ने दिए टिप्स

एफडीपी के दौरान देश के विभिन्न विशेषज्ञों ने शिक्षकों को जनरेटिव AI के शैक्षणिक उपयोग से परिचित कराया। पहले सत्र में प्रो. नरसिम्हुलु यक्कला ने बताया कि ChatGPT, Gemini जैसे AI प्लेटफॉर्म का उपयोग लेसन प्लानिंग, कंटेंट तैयार करने और पर्सनलाइज्ड लर्निंग में किस तरह किया जा सकता है। उन्होंने नई शिक्षा नीति-2020 के संदर्भ में भी AI की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।

Canva AI, Gamma और Moodle पर मिला हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण

दूसरे सत्र में चंद्र कुमार ने प्रतिभागियों को Canva AI, Gamma और अन्य ई-लर्निंग टूल्स के माध्यम से इंटरैक्टिव ई-कंटेंट तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। वहीं तीसरे सत्र में प्रो. श्रीनिवास ने NotesLM, Moodle और Gemini जैसे आधुनिक प्लेटफॉर्म्स के उपयोग की हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग कराई।

प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग और AI के जिम्मेदार उपयोग पर भी चर्चा

कार्यक्रम के दौरान लाइव प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग का प्रदर्शन किया गया, जिससे शिक्षकों ने AI के माध्यम से प्रभावी शैक्षणिक सामग्री तैयार करना सीखा। साथ ही AI के नैतिक उपयोग, प्लेजरिज्म और जिम्मेदार तकनीकी इस्तेमाल जैसे विषयों पर भी विशेषज्ञों और प्रतिभागियों के बीच विस्तृत चर्चा हुई।

प्रतिभागियों ने बताया समय की जरूरत

तीन दिवसीय कार्यक्रम का समापन 19 जुलाई को फीडबैक सत्र के साथ हुआ। प्रतिभागी शिक्षकों ने इसे अपने शिक्षण कौशल को आधुनिक बनाने वाला बेहद उपयोगी और व्यावहारिक कार्यक्रम बताया। अंत में विश्वविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर चेतना चंद्राकर ने सभी विशेषज्ञों, प्रबंधन और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

विश्वविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि भविष्य में भी शिक्षकों को नई तकनीकों से जोड़ने और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।